नाथद्वारा में बाढ़ का कहर: सड़कें बनीं नदी, वाहन और सांप बह गए

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जब नाथद्वारा, की धूल भरी गलियां अचानक पानी से लबालब भर गईं, तो स्थिति इतनी गंभीर थी कि आम नागरिकों के लिए यह मानसून नहीं, बल्कि एक अनपेक्षित आपदा लग रही थी। पिछले कुछ दिनों में हुए तेज और मूसलाधार बारिश ने इस विश्व प्रसिद्ध धार्मिक कस्बे की तैयारियों की पूरी पोल खोल दी। सड़कें नदियों बन गईं, दुकानों में पानी घुस गया, और हैरानी की बात यह है कि पानी के साथ-साथ बाइक, स्कूटी और यहां तक कि एक बड़ा सांप भी बहकर आया।

यह घटना राजस्थान सरकार के राजसमंद जिले में हुई, लेकिन इसका असर सीधे लाखों श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यापारियों की जेब पर पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी अपशिष्ट प्रबंधन और ड्रेनेज सिस्टम की कमजोरी ही इस जलभराव का मुख्य कारण है।

बाजार में हाहाकार: दुकानें डूबीं, सामान बर्बाद

गुरुवार की रात को जब बारिश शुरू हुई, तो शुरुआत सामान्य लग रही थी। लेकिन फिर मौसम बदला। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार तीन घंटों तक हुई मूसलाधार बारिश ने नाथद्वारा के निचले इलाकों और मुख्य बाजार क्षेत्रों को जलमग्न कर दिया। पानी का बहाव इतना तेज था कि कई दोपहिया वाहन पानी के साथ बह गए।

सर्राफा बाजार जैसे होंशले इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। वहां की कई दुकानों में पानी घुस गया, जिससे सोने-चांदी के आभूषण और अन्य मूल्यवान सामान को नुकसान पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय व्यापारी रामेश्वर दास (नाम बदला गया) ने बताया, "हमने कभी ऐसा नहीं देखा था। पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि हमारे पास सामान बचाने का समय ही नहीं रहा।"

इसी तरह, ETV Bharat की रिपोर्ट में उल्लेख है कि मंगलवार दोपहर बाद हुई सवा घंटे की बारिश ने भी शहर की रस्साकशी कर दी। शहरी जलनिष्कासन प्रणाली पर भारी दबाव पड़ा, जिससे बाजारों और आवासीय इलाकों में जलभराव हो गया।

प्रशासन की तैयारियों पर सवाल: 'पोल खुली'

सोशल मीडिया पर Apna Rajsamand नामक लोकप्रिय पेज ने पोस्ट किया, "नाथद्वारा में डेढ़ घंटे की बारिश ने प्रशासन की मानसून से पहले की तैयारी की पोल खोली।" इस पोस्ट में दिखाई गई वीडियो फुटेज में बाजार की गलियों में पानी के साथ एक बाइक और एक अजगर (सांप) बहते हुए दिखाई दिए। यह दृश्य लोगों के बीच हैरानी और गुस्से दोनों का कारण बना।

ऐसा क्यों हुआ? विशेषज्ञों का मानना है कि नाथद्वारा जैसे पुराने शहरों में ड्रेनेज लाइनें पुरानी हैं और वे आज के तेज बारिश के पैटर्न को संभाल नहीं पातीं। इसके अलावा, अवैध निर्माण और कचरे के ढेर ने नालों की क्षमता को और कम कर दिया है।

बांधों में बढ़ी जल आवक, तापमान में गिरावट

बांधों में बढ़ी जल आवक, तापमान में गिरावट

बारिश का असर केवल शहर तक सीमित नहीं रहा। 14 जुलाई 2025 कोमेवाड़ क्षेत्र की रिपोर्ट्स के अनुसार, ऊपरी क्षेत्रों से बहने वाले पानी ने बांधों में जल स्तर बढ़ा दिया।

  • बाघेरీ नाका बांध: इस बांध पर लगभग 2.5 फीट की 'चादर' चल रही है, यानी ओवरफ्लो हो रहा है।
  • नंदसमंद बांध: बाघेरీ नाका से आने वाले पानी के कारण यहां भी जल आवक बढ़ी है।
  • बनास नदी: यमुना स्वरोपा बनान में जल स्तर थोड़ा बढ़ा है।

मौसम विभाग के अनुसार, न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कंबलगढ़ क्षेत्र में 1 इंच बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद तापमान में स्पष्ट गिरावट आई।

मचिंद गांव में तबाही और भविष्य की चिंताएं

मचिंद गांव में तबाही और भविष्य की चिंताएं

नाथद्वारा के पास स्थित मचिंद गांव में स्थिति और भी गंभीर थी। वहां भारी बारिश के कारण तबाही मची रही और पानी में गाड़ियां बह रही थीं। ग्रामीणों ने मदद के लिए पुकार की, लेकिन प्राथमिक चरण में राहत कार्य में देरी हुई।

भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले एक-दो दिनों तक ऐसी ही स्थिति बना रह सकती है। AccuWeather के पूर्वानुमान के अनुसार, वायु गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए संवेदनशील समूहों को घरों में रहने की सलाह दी गई है।

Frequently Asked Questions

नाथद्वारा में बारिश से क्या नुकसान हुआ?

नाथद्वारा में मूसलाधार बारिश से निचले इलाकों और बाजारों में जलभराव हो गया। कई दुकानों में पानी घुसने से सामान को नुकसान पहुंचा और दोपहिया वाहन पानी के साथ बह गए। सर्राफा बाजार जैसे क्षेत्रों में व्यापारियों को भारी आर्थिक हानि हुई।

क्या नाथद्वारा में वास्तव में सांप बहा?

हाँ, स्थानीय सोशल मीडिया पेज Apna Rajsamand द्वारा साझा किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि तेज बहाव वाले पानी के साथ एक बाइक और एक बड़ा सांप (अजगर) बाजार की गलियों में बहते हुए दिखाई दिए। यह पानी के बहाव की तीव्रता को दर्शाता है।

बाघेरि नाका बांध की स्थिति क्या है?

14 जुलाई 2025 को बाघेरि नाका बांध पर लगभग 2.5 फीट की चादर चल रही थी, जिसका अर्थ है कि बांध से पानी का ओवरफ्लो हो रहा है। इससे नीचे स्थित नंदसमंद बांध और बनास नदी में जल स्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

मौसम विभाग ने अगले दिनों के लिए क्या चेतावनी दी है?

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, अगले एक से दो दिनों तक नाथद्वारा और मेवाड़ क्षेत्र में भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे बाहर निकलने से बचें और सुरक्षा सावधानियां अपनाएं।

कंबलगढ़ में बारिश की स्थिति कैसी रही?

राजसमंद जिले के कंबलगढ़ क्षेत्र में 1 इंच बारिश दर्ज की गई। इस बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई, जिससे मौसम में बदलाव महसूस किया गया। हालांकि, नाथद्वारा की तुलना में यहां जलभराव की समस्या कम गंभीर रही।